कर्मनाशा की हार पार्ट – 7 | द सहाफत न्यूज़ |
रेलवे उसपार के लोगों के जान की कीमत कौड़ियों के भाव रेलवे पार करने के लिए जान जोख़िम में डालते लोग कर्मनाशा रेलवे स्टेशन मैं एक इंसान हूँ। वो हर बात मुझे प्रभावित करती है जो इंसानियत को प्रभावित करे।” ये वाक्य भगत सिंह का है लेकिन इस बात को मैं दुबारा दोहराना चाहता हूँ क्योंकि जब लोगों के जान की कीमत कौड़ियों के भाव भी ना हो तो यहाँ के लोगों और सत्ता में बैठे प्रतिनिधियों से सवाल तो बनता है. जी हाँ कर्मनाशा बाज़ार के उत्तर में बसे करीब 10 से 15 गांवों के लोग आज भी रेलवे लाइन पार करने की समस्या से जूझ रहे है. आपको बता दे कि यहाँ से रोजाना 40-50 मेल व एक्सप्रेस ट्रेनें गुजरती है। इसके अलावा करीब 60 से अधिक माल ट्रेन व 5 से 10 पसैंजर ट्रेनें भी चलती है। जिससे की यहाँ पर हर पांच से दस मिनट बाद ट्रेनों का कारवां गुजरता रहता है. ...