कर्मनाशा की हार पार्ट – 10 | द सहाफत न्यूज़ |

विधायक के नाक के नीचे चल रहा है काला बाजारी का धंधा: बाजार मौन




भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी लाल किले से भले ही कहते हो कि “मैं न खाऊंगा न खाने दूंगा” लेकिन लगता है कि उनका ये प्रण उन्हीं के पार्टी के नेताओं को अब रास नहीं आ रही है जी हाँ रामगढ़ क्षेत्र के विधायक को देखकर कुछ ऐसा ही प्रतीत होता है क्योंकि दुर्गावती प्रखंड के कर्मनाशा बाजार में पक्की सड़क व उसके दोनों तरफ नाली निकालने के लिए मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत लगभग 60 से 65 लाख रुपये आवंटित किये गए थे. लेकिन लगता है कि ये भी कार्य बाकी कार्यों की तरह फेलियर ही नजर आता है. आपको बता दें कि अभी कुछ ही दिनों पहले G.T रोड से रेलवे स्टेशन पर जाने वाली सड़क के दोनों तरफ पक्की नाली बनकर तैयार हुआ है लेकिन उसके 2 या 3 हफ्तों में ही नाली से पानी का रिसाव होना शुरू हो गया. और बरसात के पहले झोके में ही उसकी मजबूती लोगों के सामने आ गई.

और अगर बात की जाए कर्मनाशा बाजार में बनकर तैयार हुई पक्की सड़क की तो बस इतना ही कह सकते है कि उसे लोगों को दिखने के लिए सीमेंट गिट्टी से ढाल कर सिर्फ कोरम पूरा किया गया है.

आपलोगों को मैं पहले ही #कर्मनाशा की हार पार्ट-9 में बता चूका हूँ कि अगर सड़क या नाली बनी और उसके कुछ ही दिनों बाद वो ख़राब हो जाये तो इसका मतलब है कि उसके क्वालिटी और मात्रा में कमी की गई है. लेकिन इससे हम सबको और विधायक जी को क्या मतलब| चुनाव तो हो चुके है. विधायक बन चुके है. इसमे पैसे तो आम जनता के बर्बाद हो रहे है. उन्हें तो सिर्फ खटिया पर तकिया लगा कर सोना है.
आपको बता दे कि ये सड़क मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत विधायक जी के फंड से पास हुआ है लेकिन विधायक जी को लगता है कि पैसा दे देने से काम भी अच्छे से हो जाता है और उनकी जिम्मेदारी वहीँ से ख़त्म हो जाती है लेकिन उन्हें यह समझना होगा की ठेकेदार और उससे जुड़े लोग उनके नाक के नीचे क्या गुल खिला रहे है.

यह जिम्मेदारी सिर्फ विधायक जी की नहीं है बल्कि हम सब की है क्योंकि कोई भी सरकारी कार्य किसी व्यक्ति विशेष के लिए नहीं होता बल्कि उससे पूरा समाज प्रभावित होता है.

नोट- यदि बहरों को सुनाना है तो आवाज को बहुत जोरदार होना होगा. – भगत सिंह

फ़ोटो आभार – अभिषेक तिवारी






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